जानिए अर्जुन ने दुर्योधन से क्या वरदान मांगा था और क्या वरदान को दुर्योधन ने पूरा किया था


Third party image reference

भगवान श्रीकृष्ण को अपने गुप्तचरों द्वारा इस बात का पता चल जाता हैं और तब वे पांडवों की सुरक्षा के लिए अर्जुन को उस वरदान की याद दिलाते हैं, जो दुर्योधन के प्राण बचाने पर उसने माँगने के लिए कहा था और अर्जुन ने ये कहा था कि वे उचित समय आने पर अपना वरदान दुर्योधन से माँग लेंगे।

Third party image reference

भगवान श्रीकृष्ण द्वारा इस बात को याद दिलाने पर अर्जुन उसी समय दुर्योधन के पास जाते हैं और अपने उस वरदान का स्मरण कराते हैं और वरदान स्वरुप उन 5 अभिमंत्रित स्वर्ण तीरों को मांगते हैं. अर्जुन की ये बात सुनकर दुर्योधन हतप्रभ रह जाते हैं, परन्तु अपने वचन के कारण और क्षत्रिय धर्म का पालन करते हुए वे ये अभिमन्त्रित 5 स्वर्ण तीर अर्जुन को वरदान स्वरुप दे देते हैं. इस प्रकार पांडवों के प्राणों की रक्षा होती हैं।

Third party image reference

इस प्रकार उन तीरों को अर्जुन को देने के पश्चात् दुर्योधन पितामह भीष्म के पास जाते हैं और फिर से तीरों को अभिमंत्रित करने का आग्रह करते हैं, परन्तु पितामह भीष्म इसमें अपनी असमर्थता व्यक्त करते हैं और तीरों को दोबारा अभिमंत्रित नहीं कर पाते।